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चांडाल चौकड़ी को नेस्तनाबूद करो

26 Oct

किरण बेदी पर हवाई यात्रा में भ्रष्टाचार के आरोप लग रहे हैं. किरण कई बार यह सपष्ट कर चुकी हैं कि यदि उन्होंने ऐसा किया है और उससे प्राप्त धन से अपना या अपने परिवार का भला किया हो तो सरकार अपनी किसी भी जांच एजेंसी से उनकी जांच करा सकती है तथा दोषी सिद्ध होने पर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई कर सकती है.

लेकिन ऐसा नहीं लग रहा है कि सरकार यह कदम उठाएगी. आरोप मढ़ना और बेईज्जती करना कुछ लोगों का मूल मंत्र बन चुका है. यह पहली बार नहीं है जब किरण बेदी के खिलाफ इस तरह के आरोप लगे हो. चांडाल चौकड़ी टीम अन्ना के प्रत्येक सदस्य पर आरोप लगा रही है और उनका चरित्र हनन कर रहा है. लेकिन ये लोग है कौन? ये वहीं लोग हैं जो जनलोकपाल के पक्ष में नहीं हैं.

चलिए, उस वक्त को याद करते हैं जब आंदोलन शुरु हो रहा था और जनलोकपाल बिल ड्रॉफ्ट करने के लिए संयुक्त समिति का गठन हो रहा था. वो कौन लोग थे जो कमेटी का विरोध कर रहे थे? आपको अहसास होगा कि यह चांडाल चौकड़ी थी जो विरोध में खड़ी थी. बातचीत के कई दौर के बाद अंततः मैंने पांच अप्रैल को जंतर-मंतर पर अनशन शुरु किया जहां लोग बड़ी संख्या में इकट्ठा हुए. ऐसा होने के बाद इन्हें अपनी गलती का एहसास हुआ और ये सुंयक्त समिति बनाने के लिए राजी हुए.

जब चार जून को रामलीला मैदान में बाबा रामदेव का धरना प्रदर्शन चल रहा था, तो मेरी उनसे मुलाकात अगले दिन पांच जून को तय थी, लेकिन चार जून की रात को 1.30 बजे ही बाबा रामदेव और उनके समर्थकों जिनमें पुरुष और महिलाएं, वृद्ध और बच्चे सभी शामिल थे, पर अचानक दिल्ली पुलिस ने बर्बर लाठीचार्ज कर दिया गया.

सरकार का इरादा साफ था- बाबा रामदेव और अन्ना हजारे की मुलाकात न हो. लेकिन क्या निर्दोष महिलाओं और बच्चों को बेरहमी से पीटकर दिल्ली पुलिस अपनी मर्दानगी का प्रदर्शन कर रही थी? कौन थे वो लोग जिन्होंने महिलाओं पर लाठीचार्ज किया? ये वही लोग थे जो अब आरोप लगाने का गंदा खेल खेल रहे हैं. क्या ये वो लोग नहीं हैं? इस राज का भी पर्दाफाश जरूर होगा.

संयुक्त समीति तो बन गई लेकिन ये लोग नहीं चाहते थे कि जनलोकपाल बिल पास हो. अब इस चांडाल चौकड़ी ने सीडी मामले को लेकर श्री प्रशांत भूषण और श्री शांति भूषण पर आरोप लगाने शुरु कर दिए. किरण बेदी की ही तरह प्रशांत भूषण, शांतिभूषण ने इस मामले में बेकसूर होने के अपने दावे को बरकरार रखा एवं सरकार से इस मामले की स्वतंत्र जांच कराने के लिए कहा. लेकिन ये लोग जानते हैं कि यदि ये कानूनी रास्ते पर चलेंगे तो इनका उद्देश्य पूरा नहीं होगा. इनके पास सिर्फ एक ही रास्ता था, टीम अन्ना में असहमति का प्रसार करके लोगों को भ्रमित करना और उन्हें आंदोलन में शामिल होने से रोकना.

टीम अन्ना के एक ईमानदार सदस्य रिटार्यड जस्टिस हेगड़े, जिनकी वजह से कर्नाटक में बीजेपी के मुख्यमंत्री रहे येदियुरप्पा जेल में हैं, पर भी आरोप लगाए गए. उन पर आरोप लगाने वाले लोग कौन थे? आपके सामने यह बात जल्दी ही आएगी कि उसके पीछे भी यह चांडाल चौकड़ी ही थी.

अरविंद केजरीवाल पर भी आरोप लगाए गए और एक सभा में उन पर चप्पल से हमला हुआ. इसके पीछे कौन था? 16 अगस्त 2011 को मुझे दिल्ली में जनलोकपाल बिल पास करने की मांग को लेकर धरना करना था. एक महीने से मैं इस धरना प्रदर्शन क स्थल आबंटित किए जाने हेतु सरकार से पत्र व्यावहार और व्यक्तिगत मुलाकातों के जरिए अनुमति लेने की कोशिश कर रहा था. लेकिन साजिश के तहत मेरे अनशन के लिए अनुमति नहीं दी जा रही थी और 15 अगस्त तक भी मैं सरकार की अनुमति का इंतजार ही कर रहा था. उन्होंने दिल्ली के तमाम सार्वजनिक स्थानों पर धारा 144 लगा दी. अंत में हमने तय किया कि हम अपनी गिरफ्तारी देंगे और जेल में ही अनशन पर जाएंगे. यह तथ्य कि इस साजिश के पीछे भी यह चांडाल चौकड़ी ही थी, अब स्पष्ट है.

16 अगस्त की सुबह 6 बजे मुझे मेरे घर से गिरफ्तार कर लिया गया. मैंने कोई अपराध नहीं किया था इसलिए उन्हें मुझे मेरे घर से गिरफ्तार करने का कोई अधिकार नहीं था. वो जानबूझकर मेरी बेइज्जती करना चाहते थे. मुझे तिहाड़ जेल भेज दिया गया. दोपहर चार बजे तक जरूरी कानूनी कार्रवाई की गई और हमें तिहाड़ जेल ले जाया गया. हमे एक कमरा दिया गया, कपड़े दिए गए और 6 बजे एक अधिकारी ने आकर हमे बताया कि हमारी सजा माफ कर दी गई है और हम आजाद है. अधिकारी ने बताया कि उसे आदेश दिया गया है कि हमे वहीं छोड़ दिया जाए जहां से हमे लाया गया है.

मैं आश्चर्यचकित था. सरकार ने मुझे इसलिए गिरफ्तार किया था क्योंकि मेरा धरना द्वेष फैला रहा था और दो घंटे बाद ही मुझे आजाद किया जा रहा था. क्या सरकार मैं कोई दैवीय हस्तक्षेप हो गया था और मुझे आजाद किया जा रहा था या फिर सरकार सिर्फ मजाक थी? आप अपनी मर्जी से किसी को गिरफ्तार करते हैं और फिर उसे आजाद कर देते हैं? क्या यह लोकतंत्र है? पुलिस ने शांतिपूर्वक प्रदर्शन कर रहे लोगों पर रात के दो बजे लाठीचार्ज किया और बाबा रामदेव को विमान से हिरद्वार भेजकर उनके दिल्ली आने पर पाबंदी लगा दी.

उनके आंदोलन को चांडाल चौकडी़ ने कुचल दिया और अब वो मेरे साथ भी यही करने वाले थे. उनकी योजना थी कि मुझे आजाद करने के बहाने एक कार में डालकर दिल्ली हवाई अड्डे ले जाया जाए और फिर वहां से मुझे पुणे वापस भेज कर किसी अज्ञात स्थान पर रखा जाए. यह योजना दिल्ली में मेरे आंदोलन को कुचलने के लिए थी. इस पूरी साजिश के पीछे कौन था? ये वही लोग थे जो टीम अन्ना के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियां कर रहे थे.

मैं शुरु से ही इन लोगों के इरादों पर शक कर रहा था. जब दो घंटे के भीतर ही मुझे जेल से रिहा होने की सूचना दी गई तब ही मैं इनके इरादों को भांप गया था. मैंने जेल परिसर को छोड़ने से साफ इंकार कर दिया. मैंने कहा कि जब मुझे सात दिन की सजा दी गई है तो मैं जेल में सात दिन तक ही रहूंगा.

मेरे पास आए अधिकारी ने मेरा संदेश डीआईजी को दे दिया, जिसने जवाब में कहा कि आप मेरे दफ्तर आ गए हैं अब आप वापस नहीं जा सकते. मैंने जवाब दिया कि मैं यहां इसलिए आया क्योंकि आपने मुझे बात करने के लिए बुलाया, अब आप मुझे वापस नहीं जाने दे रहे हैं, आप गलत कर रहे हैं. न ही आप मुझे जेल में वापस जाने दे रहे हैं और न ही मैं जेल से बाहर ही जा रहा हूं. अब तो आप मुझे जबरदस्ती ही जेल से बाहर निकाल सकते हैं. मैंने जेल से बाहर निकलने पर साफ इंकार कर दिया. अब चांडाल चौकड़ी का दांव उल्टा पड़ गया क्योंकि अधिकारी रात एक बजे तक सरकार से बातचीत करते रहे.

मेरे फैसले ने उनके लिए मुसीबत खड़ी कर दी थी. अब उनकी समझ में नहीं आ रहा था कि क्या किया जाए क्या न किया जाए. तीन दिन तक न मैं जेल में था न ही जेल के बाहर था. मैंने तीन दिन से स्नान भी नहीं किया था क्योंकि वहां इसकी सुविधा नहीं थी. चांडाल चौकड़ी ने मुझे जेल में डाला था ताकि वो मेरी टीम पर आरोप लगा सके.

अब सरकार के पास सिर्फ एक ही विकल्प था कि मुझे रामलीला मैदान में अनशन की अनुमित दे दी जाए. जब मैं जेल से बाहर निकला तो जनसैलाब ने मेरा स्वागत किया. जब भी चांडाल चौकड़ी ने चाल चलनी चाही, उल्टी ही पड़ी और एक बार फिर वो अपनी ही चाल का शिकार हो गए.

अगले ढाई महीने तक संयुक्त समीति सात बार मिली. टीम अन्ना द्वारा उठाए गए मुद्दे पर लंबी चर्चा हुई और फिर उन्होंने हमे आश्वस्त किया कि हमारा जनलोकपाल बिल का ड्रॉफ्ट कैबिनेट के सामने प्रस्तुत किया जाएगा लेकिन उन्होंने सरकार का कमजोर बिल पेश कर दिया और हमारी बातों को नजरअंदाज कर दिया गया.

मैं कांग्रेस पार्टी के सभी मंत्रियों को दोषी नहीं मानता और न ही पूरी सरकार को दोषी ठहराता हूं. सरकार में भी कुछ समर्पित और ईमानदार लोग हैं लेकिन वो इस चांडाल चौकड़ी के कारण अपनी आवाज नहीं उठा सकते. हम सभी सांसदों को पत्र लिख रहे हैं क्योंकि जब संतो, महात्माओं, पैगंबरों ने मानवता के भले के लिए काम किया तो उन्हें भी मुसीबतों का सामना करना पड़ा, इसलिए हमे भी मुसीबतों का सामना करना पड़ेगा. मैं अपने नजदीकी लोगों से अपील करता हूं कि चांडाल चौकड़ी द्वारा बार-बार लगाए जा रहे आरोपों का जवाब न दे. लोग इतने समझदार हैं कि सच को पहचान सकें. इसलिए उनके (और विभिन्न क्षेत्रों में काम कर रहे उनके एजेंटों के) सभी प्रयास अपने आप बेकार हो जाएंगे. भ्रष्टाचार ने लोगों को सोचने के लिए मजबूर कर दिया है. लोग निरंतर बढ़ रहे भ्रष्टाचार से गुस्से में हैं. यही कारण है कि देश के लोग मौजूदा सरकार से गुस्से में हैं.

भ्रष्टाचार से महंगाई बढ़ रही है. आम आदमी के लिए अपना घर चलाना मुश्किल हो रहा है. आम आदमी जानता है कि हम उसके लिए लड़ाई लड़ रहे हैं. इसलिए भले ही हम पर कितने ही आरोप क्यों न लगे लोगों का समर्थन हमारे साथ रहेगा. हमें मुश्किलों का सामना करते हुए आगे बढ़ना है. जो लोग सही रास्ते पर चलते हैं, उन्हें हमेशा मुश्किलों का सामना करना पड़ता है. लेकिन इतिहास गवाह है कि जीत हमेशा सत्य की ही हुई है. इसलिए हम सत्य के रास्ते पर चलते रहेंगे.

 
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Posted by on October 26, 2011 in Uncategorized

 

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