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मेरी आवाज पर देश खड़ा होगा – अन्ना हजारे

04 Sep

मैं कई सालों से युवाओं को जागृत करने की कोशिश कर रहा हूं. जागृति की लौ जल चुकी है. युवा शक्ति इसे कभी बुझने न दें. सभी युवाओं से गुजारिश है. यदि युवा मन में ठान ले तो क्या कुछ नहीं कर सकता. ‘मैं अन्ना हूं’ लिख कर, गांधी टोपी पहनकर अन्ना नहीं बना जा सकता है. इसके लिए चरित्र को शुद्ध करना होगा. समर्पण करना होगा. भारत भूमि त्याग की भूमि है. हजारों लोगों ने इसके लिए त्याग किया है.

अन्ना हजारे


देश का इतिहास गवाह है कि त्याग से आजादी मिली है. युवा वो बीज है जो आने वाले दिनों में बदलाव करेंगे. युवा त्याग नहीं करेंगे तो सारी कोशिश बेकार होगी. अन्याय को कोई सह रहा है तो वह बड़ी गलती कर रहा है. अन्याय के खिलाफ युवाओं को खड़ा होना होगा. यही आप सभी से गुजारिश है. यह भ्रष्टाचार मुक्त भारत के लिए क्रांति की शुरुआत है. जब तक सपना पूरा नहीं होता यह लड़ाई जारी रहनी चाहिए.

डॉ. बाबा साहब अंबेडकर का संविधान आज अमल में लाया जाता है. अंबेडकर ने कहा था कि अमीर-गरीब का भेद खत्म होना चाहिए. क्या यह हो रहा है? यह अंतर बढ़ता जा रहा है. देश में आर्थिक विषमता के बाद सामाजिक विषमता भी बड़ा मुद्दा है. रालेगण में गरीब किसान पर कर्ज बढ़ा तो पूरे गांव ने मिलकर उसका कर्ज चुकता किया और उसकी फसल लहलहा उठी. पूरे देश में ऐसी मिसाल कायम होनी चाहिए.

भ्रष्टाचार खत्म करने के लिए जनलोकपाल बिल की लड़ाई शुरू हो गई है. संसद में यह बिल आना चाहिए और उस पर बहस होनी चाहिए. सरकार ने मेरे आंदोलन पर कई पाबंदियां लगाई. यह आंदोलन को खत्म करने की चाल थी. मुझे अनशन के लिए जगह तक नहीं दी गई. सरकार ने हमें धोखा दिया. देश की संसद में झूठ बोलने वाले लोग पहुंच चुके हैं.

मेरे अनशन की जगह पर धारा 144 लगा दी गई. दिल्ली में जिस घर में रुका था, वहां से मुझे गिरफ्तार किया गया. मैंने वजह पूछा तो कोई वजह नहीं बताई गई. मैं बार-बार पूछता रहा कि मेरी क्या गलती है. मुझे कहा गया कि मुझे बड़े पुलिस अधिकारी के पास जाना है. फिर मुझे जेल ले गए. लेकिन जेल ले जाने के बाद दो घंटे के बाद ही मुझे छोड़ दिया गया. यह सब सरकार की चाल थी. मैंने जेल से निकलने से इनकार कर दिया. मुझे जेल में तीन दिनों तक डीआईजी के कमरे में रहना पड़ा. वहां मुझे नहाने के लिए पानी नहीं मिलता था. यह तो बनिया की दुकान जैसा था.

त्याग और सामाजिक मुद्दों के लिए जेल जाना एक अलंकार है. मैंने कहा कि मैं जेल से ही अनशन करुंगा. फिर मुझे रामलीला मैदान का विकल्प दिया गया. वहां से मेरी लड़ाई शुरू हुई तो हर तबके ने सहयोग किया. इंकलाब जिंदाबाद… भारत माता की जय… इस आंदोलन में सभी धर्मों के लोगों ने हिस्सा लिया. इस देश को बांटने वाले लोगों को जवाब मिल गया होगा. मैं उम्मीद करता हूं कि जब जब आवाज दूंगा पूरा देश उठकर खड़ा होगा.

भ्रष्टाचार की बड़ी वजह सत्ता का केंद्रीकरण हो गया है. इसे लोकतंत्र का नाम दिया जा रहा है. लोकतंत्र का असली मतलब है कि लोगों का लोगों के लिए और लोगों के द्वारा चलाया जाने वाला शासन. लेकिन आज नेताओं का शासन चल रहा है. ग्राम सभा के विकास के लिए आने वाले पैसे पर ग्राम सभा का पूरा अधिकार होना चाहिए. यदि ग्राम सेवक ग्राम सभा से बिना पूछे पैसा खर्च करता है तो उसे तत्काल निलंबित करना चाहिए. मैं सत्ता के विकेंद्रीकरण के लिए लड़ाई लड़ रहा हूं. हमारा देश कृषि प्रधान देश है. ‘नाच करे बंदर, माल खाए मदारी’ यह हालत देश के किसानों की हो गई है. किसानों को इस हालत से उबारना होगा.


(आमरण अनशन के बाद रालेगण सिद्धी में दिया गया पहला भाषण)

 
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Posted by on September 4, 2011 in Uncategorized

 

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