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आम बजट २०११-१२ का लेखा-जोखा

05 Mar

२८ फरवरी २०११ को दादा ने बहुप्रतीक्षित आम बजट पेश कर दिया है. आम आदमी की सरकार का यह आम बजट, आम आदमी की उम्मीदों पर खरा नहीं उतर पाया है. महंगाई और भ्रष्टाचार जैसी समस्याओं से हलकान आम जनता को इससे क्या राहत मिलने वाली है. यह समझ से परे है. वित्त मंत्री ने १३० वस्तुओं पर १ प्रतिशत उत्पादन शुल्क बढ़ाने की घोषणा की है, यहाँ तक कि बड़े अस्पतालों में इलाज पर भी पांच फीसदी का टैक्स लगा दिया है. जिससे महंगाई में और बढ़ोत्तरी हो सकती है. पहले से चढ़ी महंगाई को यह बजट और भड़काने वाला है. दादा ने टैक्स स्लेब में केवल २०,००० की बढ़ोत्तरी की है और उत्पादक शुल्क में भी १ फीसदी बढ़ोत्तरी कर दी है. वित्त मंत्री ने आम आदमी को दी जाने वाली सब्सिडी को सीधा लोगों तक पहुंचाने की बात कही है, इसका क्रियान्वयन किस प्रकार होगा इस पर भी संदेह है. जिसके बाद यह तो आंकड़ा लगाया ही जा सकता है कि आने वाले दिनों में आम बजट लोगों के बजट पर क्या प्रभाव डालने वाला है.

वित्तमंत्री प्रणव मुखर्जी ने सोमवार २८ मार्च २०११ को संसद में बजट प्रस्तुत किया. सर्वप्रथम दादा द्वारा प्रस्तुत बजट २०११ -१२ में शामिल की गयी चीजों पर एक नजर…..

  • सर्व शिक्षा अभियान के बजट में ४० प्रतिशत की बढ़ोत्तरी.
  • सर्व शिक्षा अभियान के अंतर्गत २१ हजार करोड़ खर्च होंगे.
  • आँगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का वेतन १५०० से बढ़ाकर ३००० रु कर दिया गया अर्थात दोगुना वेतन.
  • ५२.५ हजार करोड़ शिक्षा पर खर्च होंगे.
  • ७ फीसदी की दर से किसानों को कर्ज मिलेगा.
  • किसानों को कर्ज के लिए ४ लाख ७५ हजार करोड़ का प्रावधान.पिछले वर्ष की तुलना में १ लाख की बढ़ोतरी.
  • बंगाल व केरल में एएमयू की शाखा के लिए ५० करोड़ का प्रावधान.
  • टेगोर के नाम पर १ करोड़ के ईनाम की घोषणा.
  • आईआईएम कोलकाता को २० करोड़ की सहायता देने का प्रावधान.
  • एलपीजी,केरोसीन व खाद में मिलेगा छूट.
  • एलपीजी में छूट के बदले नगद पैसे मिलेगे.
  • केरोसीन पर भी मिलेगी नगद सब्सिडी.
  • गरीबों को करोसीन के लिए पैसे मिलेगे.
  • २०१२ तक उन २००० गावों में जहाँ २००० से अधिक की आबादी है,के लिए बैंकिंग सुविधा.
  • स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए २६ हजार ७६० करोड़ का प्रावधान.
  • गरीब बुजुर्गों को ६० साल के उम्र में पेंशन देने की योजना,जो पूर्व में ६५ वर्ष थी.
  • नदियों की सफाई के लिए २०० करोड़ रु. का प्रावधान.
  • गरीब बुजुर्गों के लिए ८० वर्ष की उम्र से ५०० रु. पेंशन की व्यवस्था.
  • लद्दाख व जम्मू के विकास के लिए २०० करोड़ रु. का प्रावधान.
  • डायरेक्ट टैक्स कोड १ अप्रैल २०१२ से लागू होगा.
  • रक्षा सेवा पर खर्च के लिए १ लाख ६४ हजार ४१५ करोड़ का प्रावधान.
  • खाद सुरक्षा बिल इस वर्ष पेश करने का प्रावधान, जबकि भूमि अधिग्रहण कानून के लिए कोई प्रावधान नहीं.
  • दिल्ली व मुंबई मेट्रो का तीसरा चरण शुरू करने का प्रस्ताव.
  • होमलोन में १ प्रतिशत की छूट के साथ ही इसकी सीमा भी बढ़ाकर १५ लाख से २५ लाख तक कर दी गयी है.
  • वेतन भोगियों को रिटर्न न भरने का प्रस्ताव. अब कम्पनियाँ भरेगी वेतनभोगियों का रिटर्न.साथ ही छोटे करदाताओं के लिए नया रिटर्न फार्म उपलब्ध करने की योजना भी इसमें शामिल है.
  • ६० वर्ष की गरीब महिला को पेंशन की योजना.
  • १ लाख ८० हजार सालाना की कमाई पर अब कोई टैक्स नहीं अर्थात १.८० लाख रु. तक आयकर छूट.
  • ८० साल से अधिक उम्र के लोगों के लिए ५ लाख तक की टैक्स छूट.
  • वरिष्ठ नागरिक छूट सीमा २.५ लाख रु.
  • २० हजार के इन्फ्रा ब्रांड पर टैक्स छूट जारी.
  • महिलाओं के लिए कोई अतिरिक्त छूट नहीं.
  • बुजुर्गों की उम्र सीमा अब ६० साल निर्धारित की गयी है.
  • रक्षा पर खर्च करने के लिए १ लाख ६४ हजार ४१५ करोड़ रु. का प्रावधान है.

सस्ता होने वाले वस्तुओं की सूची : कृषि मशीनरी,स्टैनले स्क्रीप,स्टील, कच्चा रेशम,सिल्क,रेफिजरेटर,मोबाइल,सीमेंट,गाड़ी पुर्जा,बैटरी वाली कार,प्रिंटर,कागज,एलईडी टीवी, साबुन,सौर लालटेन.
महंगा होने वाले वस्तुओं की सूची : रेडीमेड कपड़े,ब्रांडेड सोना,लोहा, हवाई यात्रा,बड़े होटलों में ठहरना.

कृषि- अब बात करते हैं किसानों की जिनके लिए कर्ज की राशि को दादा ने १,००,००० करोड़ रुपये तक बढ़ा दिया है. लेकिन दादा का यह बजट कृषि की बुनियादी जरूरतों के परे है. किसानों को अधिक कर्ज देने की अपेक्षा फसल पर लगने वाली लागत को कम किये जाने की आवश्यकता है. पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार, उड़ीसा में हरित क्रांति के लिए दादा ने ३०० करोड़ कि राशि आवंटित की है जो कि कृषि जरूरतों के लिहाज से ऊँट के मुंह में जीरा से अधिक नहीं है. वित्त मंत्री ने दलहन के उत्पादन के लिए केवल ३०० करोड़ की राशि देने का एलान किया, दादा का यह फैसला भी किसानों की उम्मीदों पर कुठाराघात है. क्योंकि ३०० करोड़ कि रकम से इतने बड़े भारत में दाल उत्पादन को क्या गति मिलेगी यह समझ से परे है. भारत की कृषि में ६० फीसदी भूमि असिंचित क्षेत्रों में है. वित्त मंत्री ने कृषि सुधारों कि महत्त्वपूर्ण कड़ी सिंचाई व्यवस्था को भी पूरी तरह नजरअंदाज किया है. जो कि कृषि क्षेत्र कि बुनियादी समस्या है. दादा ने दलहन के सरकारी समर्थन मूल्यों को तय करने की दिशा में कोई कदम नहीं उठाया है, जो दालों के उत्पादन में बढ़ोत्तरी के लिहाज से एक अच्छा कदम हो सकता था. फसलों का बीमा भी अधिक उत्पादन कि नीति में सहायक हो सकता है, इस विषय की भी आम बजट में अनदेखी की गयी. पिछड़े क्षेत्रों के विकास के लिए अलग से राशि आवंटन की आवश्यकता थी जिसे वित्त मंत्री ने नजरअंदाज कर दिया. कृषि मंत्री शरद पवार के मुताबिक़ देश में कृषि योग्य भूमि में दो प्रतिशत की कमी आई है, जिसे ध्यान में रखते हुए भूमि अधिग्रहण कानून में व्यापक सुधार की आवश्यकता थी, लेकिन यह मुद्दा भी दादा के एजेंडे में शामिल नहीं हो सका. वित्त मंत्री को यह ध्यान रखने कि आवश्यकता थी कि पुराने ढर्रे पर चलकर नए बदलाव नहीं लाये जा सकते हैं. इस लिहाज से देखा जाए तो यह आम बजट किसानों के लिए उम्मीदों के झुनझुने से ज्यादा कुछ भी नहीं है.

शिक्षा- अब बात करते हैं शिक्षा क्षेत्र कि जिसके बजट में दादा ने २४ प्रतिशत की बढ़ोत्तरी की है, शिक्षा का कुल बजट ५२,००० करोड का है. जिसमें सर्व शिक्षा अभियान के लिए २१,००० करोड़ की राशि आवंटित की गयी है. साथ ही अनुसूचित जाति-जनजाति के ४० लाख छात्रों के लिए छात्रवृत्ति की घोषणा की है, लेकिन सामान्य वर्ग के गरीब इस आम बजट से बाहर हैं. दादा ने बंगाल और केरल में एएमयू के केंद्र खोलने की घोषणा की है, जो कि अल्पसंख्यक वोटों को साधने की कवायद से ज्यादा कुछ नहीं कहा जा सकता है. शिक्षा का बजट तो पर्याप्त है, लेकिन नए सुधारों की बात पर वित्त मंत्री ने चुप्पी साधना ही बेहतर समझा है. ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा की बेहतरी के लिए नए केंद्रीय विद्यालय और नवोदय विद्यालयों को खोले जाने की आवश्यकता है, लेकिन वित्त मंत्री के एजेंडे से यह मामला बाहर ही रहा. पिछड़े राज्यों में केंद्रीय विश्वविद्यालयों की स्थापना भी एक क्रांतिकारी कदम हो सकता था, जिस पर ध्यान नहीं दिया गया. शिक्षा में सुधार के लिहाज से देखा जाये तो दादा के इस बजट से शिक्षा क्षेत्र के लिए कोई बहुत बड़ी उम्मीद नहीं दिखाई देती है.

रक्षा- दादा ने रक्षा बजट में भी पिछले वर्ष के मुकाबले ४ फीसदी की बढ़ोत्तरी की है. भारत का रक्षा बजट कुल १,६४,४१५ करोड़ का है. भारत की सामरिक जरूरतों के लिहाज से यह राशि पर्याप्त नहीं कही जा सकती है. भारत के पडोसी देशों के मुकाबले यह रक्षा बजट कम है. भारत के विरुद्ध चीन और पाकिस्तान की तैयारियों को ध्यान में रखते हुए रक्षा बजट को और बड़ा किये जाने की आवश्यकता थी. देश की सीमाओं पर बढ़ते खतरे, और नक्सलवाद की समस्या को ध्यान में रखते हुए रक्षा बजट में भारी-भरकम बढ़ोत्तरी की आवश्यकता है. लेकिन दादा के इस बजट में इस तथ्य को नजरअंदाज कर दिया गया है.

पिछड़ा वर्ग- दादा ने अन्य पिछड़ा वर्गों की आर्थिक और सामाजिक उन्नति के लिए ९,८९० करोड़ रुपये पिछड़ा वर्ग अनुदान निधि को आवंटित किया है. वित्त मंत्री की इस घोषणा से सरकार ने अपने सामाजिक चेहरे को बचाने का प्रयास किया है. दादा ने अन्य पिछड़ा वर्ग के लोगों को यह सौगात आगामी वर्ष में आने वाले चुनावों को ध्यान में रखते हुए दी है. ताकि सरकार का सामाजिक चेहरा भी बचा रहे और वोट बैंक भी सुरक्षित रह सके.

पर्यावरण – दादा ने आम बजट में ६०० करोड़ रुपये की राशि पर्यावरण की रक्षा के प्रयासों के लिए आवंटित की है. जो की पर्यावरण संरक्षण की जरूरतों के मुताबिक नहीं है. पर्यावरण के लिए आवंटित बजट में २०० करोड़ नदियों की सफाई के लिए दिया गया है. अकेले गंगा की सफाई में केवल कानपुर से लेकर इलाहाबाद तक सफाई के प्रयासों में माया सरकार ने ३०० करोड़ रुपये खर्च कर दिए, जिनका कोई उत्साहजनक नतीजा नहीं निकला है. ऐसे में आसानी से समझा जा सकता है की २०० करोड़ की रकम से नदियों की किस प्रकार सफाई हो सकेगी. दादा ने २०० करोड़ की ही राशि वन संरक्षण के लिए भी आवंटित की है, वन संरक्षण के उपायों के लिहाज से यह राशि भी पर्याप्त नहीं कही जा सकती है. आम बजट में दादा ने २०० करोड़ की ही राशि प्रदूषण नियंत्रण उपायों के लिए भी आवंटित की है. लगता नहीं की इस राशि से किसी एक शहर में भी प्रदूषण नियंत्रण उपाय किये जा सकेंगे. ऐसे में यह समझना आसान है की सरकार पर्यावरण को लेकर कितनी संजीदा है.

आयकर – वित्त मंत्री ने पिछले बजट में 1 अप्रैल 2011 से डायरेक्ट टैक्स कोड लागू करने की बात कही थी लेकिन आम सहमति बनने में देरी के चलते यह लागू नहीं हो सका. इस बजट में मुखर्जी ने कहा है कि स्थाई समिति की रिपोर्ट मिलने के पश्चात इस अधिनियम को 2011-12 में अंतिम रूप दिया जाएगा. हालांकि सरकार ने कर छूट सीमा को 1 लाख 60 हजार से बढ़ाकर 1 लाख 80 हजार किया है. इससे अधिक आय वाले लोगों के लिए आयकर में कोई बदलाव नहीं किया गया है. उम्मीद जताई जा रही थी कि डायरेक्ट टैक्स कोड लागू होने पर 2 लाख रूपये तक आयकर छूट दे दी जाएगी. लेकिन आयकर छूट सीमा में केवल 20 हजार की बढ़ोतरी की गई है.

वृद्धों के लिए- वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने आम बजट में वृद्धों के लिए आयकर छूट की सीमाएं बढ़ाकर वाहवाही लूटने का प्रयास किया है लेकिन उन्होंने आम बुजुर्गों को कोई राहत नहीं दी. मुखर्जी ने वृद्धावस्था पेंशन पाने की उम्र 65 साल से 60 साल करके सराहनीय कार्य किया है लेकिन उन्होंने 80 वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्गों के लिए ही पेंशन में वृद्धि की है वो भी केवल 200 रूपये से बढ़ाकर 500 रूपये. सरकार को 60 वर्ष व इससे ऊपर के सभी बुजुर्गों के लिए पेंशन बढ़ानी चाहिए थी. महंगाई जिस दर से बढ़ी है उसके चलते केवल 200-500 रूपये माह में गुजारा नहीं हो सकता और सरकार को समझना चाहिए था कि 80 साल की उम्र से पहले ही बड़ी संख्या में बुजुर्गों की मौत हो चुकी है. वहीं उन्होंने वृद्धों के लिए आयकर छूट में उदार रवैया अपनाया है. इस रवैये से तो केवल अमीरों को ही राहत मिलती नजर आती है.

स्वास्थ्य- सरकार ने बजट में स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए 26,760 करोड़ खर्च करने का प्रावधान किया है. स्वास्थ्य बीमा योजना का भी विस्तार करके इसे महात्मा गांधी नरेगा लाभार्थियों, बीड़ी कामगारों और अन्य तक किए जाने को कहा है जो सराहनीय कदम है लेकिन साथ ही सरकार ने ईलाज महंगा कर दिया है. लोगों को इलाज कराने और 25 से ज्यादा बिस्तर वाले अस्पतालों में ईलाज के लिए 5 प्रतिशत सेवा कर देना होगा जिससे आम लोगों की जेब ढीली होगी. जहां तम्बाकू उत्पादों पर टैक्स में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है वहीं सरकार ने इलाज महंगा कर दिया है. सरकार ने बजट में तम्बाकू उद्योग को विशेष राहत दी है. अब तक के आम बजट में ऐसा पहली बार हुआ है जब सिगरेट पर उत्पाद शुल्क नहीं बढ़ाया गया है.

महिलाओं के लिए – बजट में महिलाओं के लिए आयकर छूट सीमा न बढ़ाए जाने की आलोचना की जा रही है. महिला सशक्तिकरण को लेकर सरकार ने कोई उपाय नहीं किए हैं. हालांकि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के वेतन में जरूर वृद्धि की गई है. उनका वेतन 1500 रूपये से बढ़ाकर 3000 और सहायक कार्यकर्ताओं का वेतन 750 रूपये से बढ़ाकर 1500 रूपये कर दिया गया है. सरकार ने महिला एवं बाल विकास मंत्रालय का बजट 1650 करोड़ बढ़ाकर 12,650 करोड़ कर दिया है. यह बढ़ोतरी पिछली बार की तुलना में कम है लेकिन इसके तहत आईसीडीएस योजना विशेष लाभकारी है. इसी योजना के चलते आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का वेतन दोगुना हुआ है. वहीं दुष्कर्म पीड़ित महिलाओं का बजट 100 करोड़ बढ़ाकर 140 करोड़ कर दिया गया है.

सब्सिडी – वित्त मंत्री ने एलपीजी, कैरोसिन व खाद के लिए नकद सब्सिडी दिए जाने की बात कही है जो सराहनीय कदम है लेकिन इसके क्रियान्वयन के लिए सरकार को अधिक सावधानी बरतनी होगी. अक्सर ऐसी योजनाएं अवसरवादियों के हाथों में चली जाती है और गरीबों को इसका फायदा नहीं मिलता है. सरकार को इस बात का विशेष ध्यान रखना होगा नहीं तो भ्रष्टाचार का एक और मुद्दा सामने आते देर नहीं लगेगी.

15 लाख रूपये तक के कम लागत वाले होमलोन पर 1 प्रतिशत की ब्याज सब्सिडी दी जाएगी. हालांकि मकान की लागत 25 लाख रूपये से अधिक न हो. पहले यह सब्सिडी 10 लाख रूपये तक के लोन पर दी जाती थी जिसके तहत मकान की लागत 20 लाख रूपये निर्धारित थी. सरकार ने होमलोन की सीमा भी 15 लाख से बढ़ाकर 25 लाख कर दी है. इससे निम्न वर्ग कहीं से भी लाभान्वित दिखाई नहीं पड़ता है.

पेट्रोल व डीजल – सरकार ने पिछले बजट में डीजल और पेट्रोल की कीमतों की नीति पर फैसला लेने की बात कही थी. उम्मीद जताई जा रही थी कि पेट्रोल की कीमत नियंत्रित करने पर सरकार कोई फैसला लेगी. लेकिन इसके बाद से पेट्रोल पर से सरकारी नियंत्रण हट गया और पेट्रोल के दाम में तेजी से इजाफा हुआ. आगे भी पेट्रोल की कीमत जल्द बढ़ने की संभावना है. वहीं डीजल व कैरोसिन पर सब्सिडी बनी हुई है.

महंगाई व बेरोजगारी- सरकार ने आम आदमी के सबसे अहम मुद्दों महंगाई और बेरोजगारी निवारण से इस बजट में मुंह मोड़ लिया है. पिछले बजट में सरकार ने वादा किया था कि महंगाई पर कुछ महीनों के अंदर काबू पाने की कोशिश की जाएगी लेकिन स्थिति सबके सामने स्पष्ट है. महंगाई आसमान छू रही है जिस पर वित्त मंत्री हाथ पर हाथ धरे बैठे है. वहीं बजट में रोजगार उपलब्ध कराने के लिए भी कोई प्रयास नहीं किए गए.

भारत में तैयार हो रही युवाओं की जमात के लिए दादा के पिटारे से कुछ भी नही निकला.दादा ने बेरोजगारी की मार झेल रहे युवाओं के लिए अपने बजट में कोई भी स्थान न दे कर देश की युवा आबादी को निराश किया है.दादा के इस बजट से राहुल गाँधी के युवा नेतृत्व करने की पोल भी खुल जाती है की वर्तमान सरकार युवाओं के प्रति कितनी संजीदा है.

काला धन- भ्रष्टाचार के आरोपों से लिप्त सरकार ने काले धन से निपटने के लिए 5 सूत्री कार्यक्रम एवं एक अलग विभाग बनाने का प्रस्ताव दिया है. इन 5 सूत्री कार्यक्रमों में काले धन के विरूद्ध वैश्विक संघर्ष में साथ देना, उपयुक्त कानूनी ढांचा तैयार करना, अनुचित तरीके से कमाए गए धन से निपटने के लिए संस्थाएं स्थापित करना, क्रियान्वयन के लिए प्रणालियां विकसित करना व लोगों को कौशल का प्रशिक्षण देना शामिल है. काले धन पर समिति भी केवल दिखावा मात्र लगती है. भाजपा द्वारा गठित टास्क फोर्स ने कुल 70 लाख करोड़ रूपये की राशि विदेशी बैंकों में जमा होने का अनुमान लगाया है. सरकार ने इस धन की वापसी के लिए कोई उपाय नहीं सुझाए है.

अंत में निष्कर्ष के रूप में यही कहा जा सकता है कि आम आदमी का नारा देने वाली यूपीए सरकार के इस आम बजट में आम आदमी के हाथ कुछ नही लगा है .लेकिन दादा ने आगामी वर्ष में पांच राज्यों में होने वाले चुनावों को ध्यान में रखते हुए सरकार की साख को बचने का सफल प्रयास किया है .

 
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Posted by on March 5, 2011 in Uncategorized

 

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